मंजू मौर्या
मंजू मौर्या संघर्ष, सेवा और समर्पण का दूसरा नाम।
30 वर्षों से उत्तर प्रदेश और प्रयागराज की जनता की निस्वार्थ सेवा में समर्पित एक मुखर आवाज़।
Highlights
30+ वर्ष (समाज सेवा)
1996 से (कांग्रेस की सक्रिय सदस्या)
59 वर्ष (अनुभव और परिपक्वता)
1 लक्ष्य (समानता और न्याय)
जन्म और पृष्ठभूमि
कानपुर की धरती पर जन्मीं मंजू जी का जीवन हमेशा से ही ज़मीनी हकीकतों से जुड़ा रहा है। उनके जीवन में प्रयागराज (विशेषकर फाफामऊ विधानसभा) का एक विशेष स्थान है। ग्राम-सुनियाँवा, लाल गोपालगंज उनका पैतृक निवास है, जहाँ से उन्होंने ग्रामीण और पिछड़े समाज की चुनौतियों को बहुत करीब से समझा।
उनके पिता श्री बंशी लाल मौर्य जी के आदर्शों ने उनके चरित्र का निर्माण किया। वहीं, उनके पति श्री राम नारायण मौर्य (अधिवक्ता, उच्च न्यायालय इलाहाबाद) के कानूनी और बौद्धिक दृष्टिकोण ने उनके सामाजिक संघर्षों को एक मजबूत और सुरक्षित आधार प्रदान किया।
एक स्नातक (Graduate) महिला होने के नाते, मंजू जी का हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि समाज की कुरीतियों और पिछड़ेपन को केवल शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है।
जनसेवा के लिए राजनीति का चुनाव
समाज सेवा करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि बड़े बदलावों के लिए व्यवस्था का हिस्सा बनना ज़रूरी है। इसी उद्देश्य के साथ, 1996 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सक्रिय सदस्यता ग्रहण की और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
कांग्रेस पार्टी में निभाए गए प्रमुख दायित्व
पूर्व महासचिव - उ.प्र. युवा कांग्रेस, लखनऊ।
पूर्व शहर अध्यक्ष - महिला कांग्रेस कमेटी, प्रयागराज।
पूर्व उपाध्यक्ष - जिला कांग्रेस कमेटी, प्रयागराज।
पूर्व सदस्य - प्रदेश कांग्रेस कमेटी (P.C.C.), लखनऊ।
पूर्व बी.आर.ओ. - कांग्रेस कमेटी, सोनभद्र।
पर्यवेक्षक - निकाय चुनाव 2011 (मऊआइमा)।
कांग्रेस पार्टी में निभाए गए प्रमुख दायित्व
जनता के अधिकारों की लड़ाई
मंजू जी ने केवल पद के लिए नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ बनने के लिए चुनाव लड़े। 2017 में फूलपुर विधानसभा और 2022 में प्रतापपुर विधानसभा से उन्होंने पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा। भले ही चुनावी नतीजे पक्ष में न रहे हों, लेकिन जनता के दिलों में उन्होंने अपनी एक अमिट छाप छोड़ी। पूर्व में वह नगर निगम प्रयागराज (भारद्वाजपुरम्) से सभासद भी रह चुकी हैं।
पिछड़े वर्गों की मुखर आवाज़
वर्तमान में महासचिव (OBC पिछड़ा वर्ग, उत्तर प्रदेश कांग्रेस) के रूप में, मंजू जी पूरे प्रदेश में पिछड़े वर्गों के अधिकारों, आरक्षण और उनके सम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने 'मौर्य शाक्य, सैनी, कुशवाहा महासभा' की पूर्व राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी समाज को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
आधी आबादी का पूरा हक
‘कुशवाहा महासभा (महिला) उ.प्र.’ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते, उन्होंने महिलाओं को उनके कानूनी और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया है। उनका मानना है कि जब तक महिला आर्थिक और सामाजिक रूप से स्वतंत्र नहीं होगी, तब तक राज्य का विकास संभव नहीं है।
समाज कल्याण के लिए किए गए कार्य
उ.प्र. राज्य समाज कल्याण बोर्ड, लखनऊ की दो बार पूर्व सदस्य के रूप में कार्य।
सरकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का सफल प्रयास।
शांति और समानता का मार्ग
समाज में समरसता और समानता स्थापित करने के लिए वह लार्ड बुद्धा वेलफेयर सोसाइटी, प्रयागराज (सचिव) और प्रियदर्शी अशोक मिशन भारत (संरक्षक) जैसे महत्वपूर्ण संगठनों से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
फाफामऊ: मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी
वर्तमान में प्रभारी (254 विधानसभा, फाफामऊ) के दायित्व का निर्वहन करते हुए, मंजू जी का एकमात्र लक्ष्य फाफामऊ में शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसर पैदा करना है। फाफामऊ की हर सड़क, हर गाँव का विकास ही उनका प्राथमिक संकल्प है।
मेरा संकल्प
"राजनीति मेरे लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि समाज के शोषित और वंचित वर्गों के आंसू पोंछने का एक माध्यम है। जब तक शरीर में प्राण हैं, मेरा यह जीवन पिछड़े वर्गों, महिलाओं और फाफामऊ की जनता के लिए समर्पित रहेगा।"
मंजू मौर्या मेरा संकल्प
मंजू मौर्या
कानपुर में जन्मीं और प्रयागराज की माटी से गहराई से जुड़ीं मंजू मौर्या, पिछले तीन दशकों से समाज सेवा और राजनीति में सक्रिय हैं। वह केवल एक नेत्री नहीं, बल्कि हर उस आम इंसान की आवाज़ हैं जो अपने हकों के लिए लड़ रहा है।
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